Showing posts with label नेता. Show all posts
Showing posts with label नेता. Show all posts
Saturday, December 10, 2011
Friday, September 23, 2011
देश के कर्णधार...
देश के कर्णधार ही हैं जबसे लंगूर हो गए,
आँख पे पट्टी रख गांधारी से मजबूर हो गए|
बह रही हैं स्वार्थ की नदियाँ यहाँ पे दोस्तों,
लोमड़ी की खातिर हम ही अंगूर हो गए||
Labels:
corruption,
fox,
grapes,
manas khatri,
अंगूर,
आँख,
कर्णधार,
चार पंक्तियाँ ही काफी,
देश,
नेता,
मानस खत्री,
मुक्तक,
युवा,
राजनीति,
लोमड़ी
Sunday, February 6, 2011
चुनाव के मौसम में...
चुनाव के मौसम में सब बीमार हो गए,
मतदाताओं से ज़्यादा उम्मीदवार हो गए|
१०वीं Fail हैं, इन्हें M.L.A. बनना है,
गधे भी घोड़े पर सवार हो गए||
Labels:
donkey,
election,
manas khatri,
mla,
politics,
vote,
voters,
उम्मीदवार,
गधा,
चार पंक्तियाँ ही काफी,
चुनाव,
नेता,
बीमार,
मतदाता,
मानस खत्री,
मुक्तक,
मौसम,
राजनीति,
हास्य कविता
Sunday, December 12, 2010
हिन्दुस्तान में घोटालों की...
Friday, December 10, 2010
Subscribe to:
Posts (Atom)