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Friday, December 30, 2011

जिसे था लटकना...

जिसे था लटकना वो तोड़ रहा 'शाही थाल' है,
लटक रहा तो बस अपना बिल 'लोकपाल' है|
तुम लटक कर ही Try करो, हम COMPLAN पीते हैं,
ज़रा चुनाव आने दो, फिर पूछेंगे जनाब क्या हाल है?

Monday, December 12, 2011

आम आदमी जबसे...

आम आदमी जबसे बेलगाम होने लगा,
जूता चप्पल है तब से आम होने लगा|
सिंह पुत्र आखिर क्यों चुप रहे मानस,
देशद्रोहियों का खास इंतजाम होने लगा||

Saturday, December 10, 2011

इनके Sense का सर...

इनके Sense का 'सर' नहीं है,
हमें अब ज़रा भी डर नहीं है|
ये स्वतंत्र विचारों का मंच है 'सिब्बल साहब'!
आपके बाप का घर नहीं है||

Friday, September 23, 2011

देश के कर्णधार...

देश के कर्णधार ही हैं जबसे लंगूर हो गए,
आँख पे पट्टी रख गांधारी से मजबूर हो गए|
बह रही हैं स्वार्थ की नदियाँ यहाँ पे दोस्तों,
लोमड़ी की खातिर हम ही अंगूर हो गए||