Tuesday, February 14, 2012

Valentine's Day की कथा सुन बोले प्रभु श्री राम...

Valentine's Day की कथा सुन बोले प्रभु श्री राम,
मनुजा तेरी इस कहानी में दीखता नहीं है धाम|
७ दिन में ७० करम फिर भी Guarantee नहीं!
एक धनुष ही तोड़ किया भाइयों तक का इंतज़ाम||



४ पंक्तियाँ प्रेम पर, इस 'अंतराष्ट्रीय पर्व' के नाम| किताबों की दुनिया से घिरा हूँ, तो वहीँ से कुछ पंक्तियाँ निकाल कर लाया हूँ-



दिल की किताबों के उड़ने लगे पन्ने,
Cover पे तुमको देख जुड़ने लगे पन्ने|
पढ़ना शुरू किया तो पढता ही रहा ,
बहने लगीं हवाएं तो मुड़ने लगे पन्ने||



प्रेम अमर होता है| आज के युग में सच्चा प्रेम पाना लगभग नामुमकिन सा है|  प्रेम से जुडी मेरी अन्य रचनायें इस लिंक पर पढ़ें-



http://manaskhatri.wordpress.com/tag/love/

Monday, January 30, 2012

विनती स्वीकार दो मैया...

अंधियारे को प्रकाश की झन्कार दो मैया,
ज्ञान की धारा को निश्चित आकार दो मैया|
ऋतु बसंत सी पुलकित हो जीवन की क्यारी-क्यारी,
गगन सा 'मानस' सज उठे, विनती स्वीकार दो मैया||

Thursday, January 5, 2012

बिक गए...

नेकी, सच्चाई , ईमान बिक गए,
शराफत के सारे सामान बिक गए|
न मान न मर्यादा न धर्म न देश,
लगता है अब तो इन्सान बिक गए||

Tuesday, January 3, 2012

आसमान में हैं...

आसमान में हैं बैठे दीवाने कितने,
एक चाँद के पीछे हैं मस्ताने कितने|
आवारा फिरते तारों की अज़ब कहानी है,
आँख मार बन रहे हैं अनजाने कितने||

Friday, December 30, 2011

जिसे था लटकना...

जिसे था लटकना वो तोड़ रहा 'शाही थाल' है,
लटक रहा तो बस अपना बिल 'लोकपाल' है|
तुम लटक कर ही Try करो, हम COMPLAN पीते हैं,
ज़रा चुनाव आने दो, फिर पूछेंगे जनाब क्या हाल है?