Valentine's Day की कथा सुन बोले प्रभु श्री राम,
मनुजा तेरी इस कहानी में दीखता नहीं है धाम|
७ दिन में ७० करम फिर भी Guarantee नहीं!
एक धनुष ही तोड़ किया भाइयों तक का इंतज़ाम||
४ पंक्तियाँ प्रेम पर, इस 'अंतराष्ट्रीय पर्व' के नाम| किताबों की दुनिया से घिरा हूँ, तो वहीँ से कुछ पंक्तियाँ निकाल कर लाया हूँ-
दिल की किताबों के उड़ने लगे पन्ने,
Cover पे तुमको देख जुड़ने लगे पन्ने|
पढ़ना शुरू किया तो पढता ही रहा ,
बहने लगीं हवाएं तो मुड़ने लगे पन्ने||
प्रेम अमर होता है| आज के युग में सच्चा प्रेम पाना लगभग नामुमकिन सा है| प्रेम से जुडी मेरी अन्य रचनायें इस लिंक पर पढ़ें-
अंधियारे को प्रकाश की झन्कार दो मैया,
ज्ञान की धारा को निश्चित आकार दो मैया|
ऋतु बसंत सी पुलकित हो जीवन की क्यारी-क्यारी,
गगन सा 'मानस' सज उठे, विनती स्वीकार दो मैया||
नेकी, सच्चाई , ईमान बिक गए,
शराफत के सारे सामान बिक गए|
न मान न मर्यादा न धर्म न देश,
लगता है अब तो इन्सान बिक गए||
आसमान में हैं बैठे दीवाने कितने,
एक चाँद के पीछे हैं मस्ताने कितने|
आवारा फिरते तारों की अज़ब कहानी है,
आँख मार बन रहे हैं अनजाने कितने||
जिसे था लटकना वो तोड़ रहा 'शाही थाल' है,
लटक रहा तो बस अपना बिल 'लोकपाल' है|
तुम लटक कर ही Try करो, हम COMPLAN पीते हैं,
ज़रा चुनाव आने दो, फिर पूछेंगे जनाब क्या हाल है?