नेशनल पी.जी. कॉलेज, लखनऊ के वार्षिकोत्सव 'ओज-२०१२-१३' के अंतर्गत आयोजित 'काव्य लेखन प्रतियोगिता' में प्रथम-स्थान प्राप्त हुआ!
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नेशनल पी.जी. कॉलेज, लखनऊ के वार्षिकोत्सव 'ओज-२०१२-१३' के अंतर्गत आयोजित 'काव्य लेखन प्रतियोगिता' में प्रथम-स्थान प्राप्त हुआ!
कुछ वर्षों पहले बड़ी ही शान के साथ कहा जाता था, की “सामने वाला बड़ा मकान, Engineer साहब का है।” आज माँ-बाप पढाई के प्रति इतना अधिक सचेत हैं, की बच्चे का नामकरण संस्कार बाद में होता है, वो भविष्य में क्या करेगा पहले से ही तय हो जाता है। देश को लाखों की संख्या में Engineers की जरूरत है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता। पर आज गली और चैराहे में खुल रहे कॉलेजों के बीच Engineering की पढ़ाई एक मजाक बन कर रह गई है। अगर हर कोई Engineer ही बन गया तो हमारे देश का क्या होगा? क्रिकेट का अगला ‘सचिन तेन्दुलकर’ कौन होगा? फिल्मों का महानायक ‘अमिताभ बच्चन’ हम फिर कहां से लायेगे? और लता मंगेश्कर जैसा मधुर गाने वाली गायिका फिर कहां मिलेंगी? किसी शायर ने खूब कहा है- ‘बच्चो के नन्हे हाथो को चांद सितारे छूने दो, चार किताबे पढ़कर भी ये हम जैसे हो जायेगे...’
जिन्होंने 'मानस' को 'मानस' बनाया, ऐसे तमाम शिक्षकों को नमन! 'शिक्षक दिवस' की शुभकामनाएं|